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‘भ्रष्टाचार पर वार’ से सत्ता पर प्रहार की रणनीति पर भाजपा, क्या घोटालों की गूंज बदल देगी बंगाल की राजनीति?

इंद्रजीत सिंह, कोलकाता। बंगाल की सियासत में भ्रष्टाचार एक बार फिर केंद्रीय मुद्दा बनकर उभरा है। भाजपा इसे विधानसभा चुनाव में अपने सबसे धारदार और निर्णायक हथियार के रूप में पेश कर रही है।

पिछले कुछ वर्षों में सामने आए घोटालों और भ्रष्टाचार के मामलों को पार्टी महज आरोपों तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि इन्हें “व्यवस्था परिवर्तन” की अनिवार्यता से जोड़ते हुए जनता के बीच एक व्यापक राजनीतिक नैरेटिव में बदल रही है।

बीते चार-पांच वर्षों में सामने आए विभिन्न मामलों में सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं की गिरफ्तारी ने इस मुद्दे को और धार दी है।

शिक्षक भर्ती और पालिका भर्ती घोटालों में रिश्वत लेकर अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के आरोप लगे, जबकि राशन घोटाले में गरीबों के हिस्से का अनाज बाजार में बेचने की बात सामने आई।

वहीं कोयला और मवेशी तस्करी जैसे मामलों को भी भाजपा संगठित भ्रष्टाचार की मिसाल के तौर पर उछाल रही है। भाजपा इन सभी मामलों को एक व्यापक संदेश में पिरो रही है यानी “भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई” और “व्यवस्था परिवर्तन की जरूरत”।