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बंगाल चुनाव: संदेशखाली में बदले हालात, लेकिन डर अभी बाकी; ‘भय बनाम भरोसा’ की लड़ाई

सुबह की हल्की हवा में कालिंदी नदी, भेड़ी (मछली पालन केंद्र) और धूप में सूखती मिट्टी की गंध घुली है। इस प्राकृतिक शांति के बीच संदेशखाली की फिजा में एक अनकहा सन्नाटा अब भी तैर रहा है। हवा भी धीरे चल रही है, मानो डर को जगाना नहीं चाहती।

कोलकाता के करीब स्थित यह द्वीपीय इलाका, जो कभी उत्पीड़न और भय का प्रतीक बन गया था, अब एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। कभी शाहजहां शेख और उसके सहयोगियों के नाम से कांपने वाला यह इलाका अब बदलता दिख रहा है।